सूरत का ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव (Main) Aacharya Vimalsagarsuriji

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Aacharya Vimalsagarsuriji

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Күн бұрын

◆ सत्य को समझने के लिए सम्यक् दृष्टि चाहिये. जो चमड़े की आंखों से दिखाई देता है और मन को पसंद है, वही सत्य है, यह कतई आवश्यक नहीं है.
◆ मोह, ममत्व और अज्ञान के कारण अनेक हकीकतें हम स्वीकार ही नहीं करते. इसीलिए आचारांग सूत्र में भगवान महावीर ने मोह और अज्ञान को दुःखों का कारखाना कहा है. पूरा संसार इन्हीं की बुनियाद पर खड़ा है.
◆ सम्यग् ज्ञान और सम्यक् दृष्टिकोण के अभाव में पंचसूत्र का यह शाश्वत सत्य हम समझ नहीं पाते कि.....
- संसार दुःखमय है,
- दुःख का प्रतिफल देने वाला है और
- परंपरा में दुःखों का अनुबंध कराने वाला है.
इसे स्वीकार करना सरल नहीं है. अधिकांश लोग तो पूरी की पूरी जिन्दगी गवां देते हैं, लेकिन इस वास्तविकता को स्वीकार नहीं कर पाते हैं. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण दयनीय स्थिति है. जो इस सत्य को समझ लेते हैं, सिर्फ वे ही संसार से विरक्त होने का पुरुषार्थ करते हैं.
◆ अनंत उपकारी अरिहंत प्रभु की असीम कृपा और
◆ परम श्रद्धेय आचार्य श्री बुद्धि-कीर्ति-कैलास-सुबोध-मनोहर-कल्याण-पद्म-वर्धमान-विमलसागरसूरीश्वरजी महाराज साहब के अनुग्रह भरे आशीर्वाद से.....
◆ सूरत की धर्मधरा से आगे बढ़ा मुमुक्षु निमितकुमार श्रीश्रीमाल का विरति का साधना-पथ.
◆ प्रस्तुत है उस ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण अविस्मरणीय गौरवशाली प्रसंग.....
◆ Part-5
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It is a generous campaign dedicated to Lord Mahaveer's principle in the name of Revolutionary, Versatile & Vigorous Preacher Aacharya Shree Vimalsagarsuriji.
It is Purely Sacred, Perceptional & Intellectual effort to bring one’s attention on life values ​​in the form of Religious Integrity, Social Intimacy, National Pride, Human Values, Spiritual Supremacy,
Non Violence, Good Faith, Vegetarianism, Indian Culture, Karma Theory & much more.
It Emphasizes on Awakening the Youth, Prospering Women Welfare, Promoting Communal Harmony, Maintaining Cultural Pride & Enhancing Jain Ideology.
क्रांतिकारी-ओजस्वी प्रवचनकार आचार्य श्री विमलसागरसूरिजी महाराज के प्रवचन और विविध आयोजन भगवान महावीरस्वामी के सिद्धांतों को समर्पित सर्व हितकारी अभियान हैं.
यह जैनधर्म, अध्यात्म, समाज, संस्कृति, राष्ट्रीयता, अहिंसा, नैतिकता, सुसंस्कार, शाकाहार, सद्भावना, आहार विज्ञान, कर्मवाद और मानवता की सेवा का पावन पुरुषार्थ है.
सकारात्मक सोच, युवा जागरण, कन्या उत्कर्ष, साम्प्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव इसके सार्थक माईल स्टोन हैं.

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